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#nazm — Public Fediverse posts

Live and recent posts from across the Fediverse tagged #nazm, aggregated by home.social.

  1. हमेशा देर कर देता हूँ
    by मुनीर नियाज़ी

    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
    ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
    उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
    बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
    हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

    #nazm

  2. हमेशा देर कर देता हूँ
    by मुनीर नियाज़ी

    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
    ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
    उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
    बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
    हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

    #nazm

  3. हमेशा देर कर देता हूँ
    by मुनीर नियाज़ी

    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
    ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
    उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
    बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
    हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

    #nazm

  4. हमेशा देर कर देता हूँ
    by मुनीर नियाज़ी

    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
    ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
    उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
    बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
    हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

    #nazm

  5. हमेशा देर कर देता हूँ
    by मुनीर नियाज़ी

    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
    ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
    उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
    बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
    हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

    #nazm

  6. CW: Faiz Urdu Poetry + song link

    One of my favourite covers of Nayyara Noor, discovered after she passed away recently, is this angelic rendition by Muniba Mazari. 'Yeh Haath Salaamat Hain Jab Tak' from Faiz Ahmed Faiz's 'Shorish-e-Barbat-o-Neyy' ('The Roaring Swell of the Lyre and Flute').

    Enjoy, and good night. (Poem section and translation in following post, if you'd like to understand better.)

    #urdu #poetry #pakistan #faiz #FaizAhmedFaiz #shaayri #nazm #NayyaraNoor #MunibaMazari

    youtu.be/ll6kl5T6Y28

  7. "ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब दिल हैं न आँखें न साँसें कि जो
    रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जाएँगे
    जिस्म की मौत से ये भी मर जाएँगे
    ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब तो रोशनी हैं नवा हैं हवा हैं
    जो काले पहाड़ों से रुकते नहीं
    ज़ुल्म के दोज़खों से भी फुकते नहीं
    रोशनी और नवा के अलम
    मक़्तलों में पहुँचकर भी झुकते नहीं
    ख़्वाब तो हर्फ़ हैं
    ख़्वाब तो नूर हैं
    ख़्वाब सुक़रात हैं
    ख़्वाब मंसूर हैं"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #nazm #urdu #rekhta

  8. "ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब दिल हैं न आँखें न साँसें कि जो
    रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जाएँगे
    जिस्म की मौत से ये भी मर जाएँगे
    ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब तो रोशनी हैं नवा हैं हवा हैं
    जो काले पहाड़ों से रुकते नहीं
    ज़ुल्म के दोज़खों से भी फुकते नहीं
    रोशनी और नवा के अलम
    मक़्तलों में पहुँचकर भी झुकते नहीं
    ख़्वाब तो हर्फ़ हैं
    ख़्वाब तो नूर हैं
    ख़्वाब सुक़रात हैं
    ख़्वाब मंसूर हैं"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #nazm #urdu #rekhta

  9. जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
    लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो

    फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सरे-मिम्बर है
    किसके है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो लो

    ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुमने
    क्यों पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो

    इन चिराग़ों के तले ऐसे अंधेरे क्यों हैं
    तुम भी रह जाओगे हैरान ज़रा देख तो लो

    तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
    निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

    ये सताइश की तमन्ना ये सिले की परवाह
    कहाँ लाए हैं ये अरमान ज़रा देख तो लो

    ~ जावेद अख़्तर

    #poetry #nazm #urdu #JavedAkhtar #Rekhta

  10. जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
    लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो

    फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सरे-मिम्बर है
    किसके है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो लो

    ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुमने
    क्यों पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो

    इन चिराग़ों के तले ऐसे अंधेरे क्यों हैं
    तुम भी रह जाओगे हैरान ज़रा देख तो लो

    तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
    निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

    ये सताइश की तमन्ना ये सिले की परवाह
    कहाँ लाए हैं ये अरमान ज़रा देख तो लो

    ~ जावेद अख़्तर

    #poetry #nazm #urdu #JavedAkhtar #Rekhta

  11. इधर से आज इक किसी के ग़म की
    कहानी का कारवाँ जो गुज़रा
    यतीम आँसू ने जैसे जाना
    कि इस कहानी की सरपरस्ती मिले
    तो मुम्किन है
    राह पाना
    तो इक कहानी की उंगली थामे
    उसी के ग़म को रूमाल करता
    उसी के बारे में
    झूठे-सच्चे सवाल करता
    ये मेरी पलकों तक आ गया है।

    ~ जावेद अख़्तर

    4/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  12. इधर से आज इक किसी के ग़म की
    कहानी का कारवाँ जो गुज़रा
    यतीम आँसू ने जैसे जाना
    कि इस कहानी की सरपरस्ती मिले
    तो मुम्किन है
    राह पाना
    तो इक कहानी की उंगली थामे
    उसी के ग़म को रूमाल करता
    उसी के बारे में
    झूठे-सच्चे सवाल करता
    ये मेरी पलकों तक आ गया है।

    ~ जावेद अख़्तर

    4/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  13. यतीम आँसू, यसीर आँसू
    न मोतबर था
    न रास्तों से ही बाख़बर था
    तो चलते चलते
    वो थम गया था
    ठिठक गया था
    झिझक गया था

    3/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  14. यतीम आँसू, यसीर आँसू
    न मोतबर था
    न रास्तों से ही बाख़बर था
    तो चलते चलते
    वो थम गया था
    ठिठक गया था
    झिझक गया था

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  15. क्या मैं ये समझूँ
    पहले कहीं नहीं था
    मुझे तो शक है कि ये कहीं था
    ये मेरे दिल और मेरी पलकों के दरमियाँ
    इक जो फ़ासला है
    जहाँ ख़यालों के शहर ज़िंन्दा हैं
    और ख्वाबों की तुर्बतें हैं
    जहाँ मुहब्बत के उजड़े बागों में
    तलि्ख़यों के बबूल हैं
    और कुछ नहीं है
    जहाँ से आगे हैं
    उलझनों के घनेरे जंगल
    ये आँसू
    शायद बहुत दिनों से
    वहीं छिपा था
    जिन्होंने इसको जनम दिया था
    वो रंज तो मसलेहत के हाथों
    न जाने कब क़त्ल हो गये थे
    तो करता फिर किसपे नाज़ आँसू
    कि हो गया बेजवाज़ आँसू

    2/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  16. क्या मैं ये समझूँ
    पहले कहीं नहीं था
    मुझे तो शक है कि ये कहीं था
    ये मेरे दिल और मेरी पलकों के दरमियाँ
    इक जो फ़ासला है
    जहाँ ख़यालों के शहर ज़िंन्दा हैं
    और ख्वाबों की तुर्बतें हैं
    जहाँ मुहब्बत के उजड़े बागों में
    तलि्ख़यों के बबूल हैं
    और कुछ नहीं है
    जहाँ से आगे हैं
    उलझनों के घनेरे जंगल
    ये आँसू
    शायद बहुत दिनों से
    वहीं छिपा था
    जिन्होंने इसको जनम दिया था
    वो रंज तो मसलेहत के हाथों
    न जाने कब क़त्ल हो गये थे
    तो करता फिर किसपे नाज़ आँसू
    कि हो गया बेजवाज़ आँसू

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  17. आँसू

    किसी का ग़म सुन के
    मेरी पलकों पे
    एक आँसू जो आ गया है
    ये आँसू क्या है

    ये आँसू क्या इक गवाह है
    मेरी दर्द-मंदी का मेरी इंसान-दोस्ती का
    ये आँसू क्या इक सुबूत है
    मेरी ज़िंदगी में ख़ुलूस की एक रौशनी का
    ये आँसू क्या ये बता रहा है
    कि मेरे सीने में एक हस्सास दिल है
    जिसने किसी की दिलदोज़ दास्ताँ जो सुनी
    तो सुनके तड़प उठा है
    पराये शोलों में जल रहा है
    मगर मैं फिर ख़ुद से पूछता हूँ
    ये दास्ताँ तो अभी सुनी है
    ये आँसू भी क्या अभी ढला है
    ये आँसू

    1/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  18. आँसू

    किसी का ग़म सुन के
    मेरी पलकों पे
    एक आँसू जो आ गया है
    ये आँसू क्या है

    ये आँसू क्या इक गवाह है
    मेरी दर्द-मंदी का मेरी इंसान-दोस्ती का
    ये आँसू क्या इक सुबूत है
    मेरी ज़िंदगी में ख़ुलूस की एक रौशनी का
    ये आँसू क्या ये बता रहा है
    कि मेरे सीने में एक हस्सास दिल है
    जिसने किसी की दिलदोज़ दास्ताँ जो सुनी
    तो सुनके तड़प उठा है
    पराये शोलों में जल रहा है
    मगर मैं फिर ख़ुद से पूछता हूँ
    ये दास्ताँ तो अभी सुनी है
    ये आँसू भी क्या अभी ढला है
    ये आँसू

    1/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  19. कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया

    वो लोग बहुत ख़ुशक़िस्मत थे
    जो इश्क़ को काम समझते थे
    या काम से आशिक़ी करते थे
    हम जीते जी मसरूफ़ रहे
    कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

    काम इश्क़ के आड़े आता रहा
    और इश्क़ से काम उलझता रहा
    फिर आख़िर तंग आकर हम ने
    दोनों को अधूरा छोड़ दिया

    ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    #Faiz #Poetry #Nazm #Urdu #FaizAhmadFaiz #Rekhta

  20. कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया

    वो लोग बहुत ख़ुशक़िस्मत थे
    जो इश्क़ को काम समझते थे
    या काम से आशिक़ी करते थे
    हम जीते जी मसरूफ़ रहे
    कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

    काम इश्क़ के आड़े आता रहा
    और इश्क़ से काम उलझता रहा
    फिर आख़िर तंग आकर हम ने
    दोनों को अधूरा छोड़ दिया

    ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    #Faiz #Poetry #Nazm #Urdu #FaizAhmadFaiz #Rekhta

  21. "तेरी नज़्म से गुज़रते वक़्त खदशा रहता है
    पांव रख रहा हूँ जैसे, गीली लैंडस्केप पर इमरोज़ के तेरी नज़्म से इमेज उभरती है
    ब्रश से रंग टपकने लगता है
    वो अपने कोरे कैनवास पर नज्में लिखता है,
    तुम अपने कागजों पर नज्में पेंट करती हो"

    ~ गुलज़ार

    #AmritaPritam #Gulzar #poetry #nazm

  22. "तेरी नज़्म से गुज़रते वक़्त खदशा रहता है
    पांव रख रहा हूँ जैसे, गीली लैंडस्केप पर इमरोज़ के तेरी नज़्म से इमेज उभरती है
    ब्रश से रंग टपकने लगता है
    वो अपने कोरे कैनवास पर नज्में लिखता है,
    तुम अपने कागजों पर नज्में पेंट करती हो"

    ~ गुलज़ार

    #AmritaPritam #Gulzar #poetry #nazm

  23. "आओ फिर नज़्म कहें
    फिर किसी दर्द को सहलाकर सुजा ले आँखें
    फिर किसी दुखती हुई रग में छुपा दें नश्तर
    या किसी भूली हुई राह पे मुड़कर एक बार
    नाम लेकर किसी हमनाम को आवाज़ ही दें लें

    फिर कोई नज़्म कहें...."

    ~ गुलज़ार

    #poetry #nazm #gulzar #urdu #Rekhta

  24. "आओ फिर नज़्म कहें
    फिर किसी दर्द को सहलाकर सुजा ले आँखें
    फिर किसी दुखती हुई रग में छुपा दें नश्तर
    या किसी भूली हुई राह पे मुड़कर एक बार
    नाम लेकर किसी हमनाम को आवाज़ ही दें लें

    फिर कोई नज़्म कहें...."

    ~ गुलज़ार

    #poetry #nazm #gulzar #urdu #Rekhta

  25. कभी सीने पर रखकर लेट जाते थे
    कभी गोदी में लेते थे
    कभी घुटनों को अपने रिहल की सूरत बनाकर
    नीम सजदे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
    वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी
    मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
    और महके हुए रुक्के
    किताबें मँगाने, गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
    उनका क्या होगा
    वो शायद अब नही होंगे!!

    ~ गुलज़ार

    3/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  26. कभी सीने पर रखकर लेट जाते थे
    कभी गोदी में लेते थे
    कभी घुटनों को अपने रिहल की सूरत बनाकर
    नीम सजदे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
    वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी
    मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
    और महके हुए रुक्के
    किताबें मँगाने, गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
    उनका क्या होगा
    वो शायद अब नही होंगे!!

    ~ गुलज़ार

    3/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  27. कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
    कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं
    बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
    जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
    जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
    अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है
    किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, वो कट गया है

    2/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  28. कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
    कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं
    बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
    जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
    जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
    अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है
    किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, वो कट गया है

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    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  29. किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
    बड़ी हसरत से तकती हैं
    महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
    जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
    अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
    बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें
    उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
    जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
    जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं

    1/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  30. किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
    बड़ी हसरत से तकती हैं
    महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
    जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
    अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
    बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें
    उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
    जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
    जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं

    1/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  31. To the people who love books and reading them. Here is a nazm for you. One of the best by Gulzar Sahab!

    youtu.be/tEBHmsx2Pjw

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  32. To the people who love books and reading them. Here is a nazm for you. One of the best by Gulzar Sahab!

    youtu.be/tEBHmsx2Pjw

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  33. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों"

    ~ साहिर लुधियानवी

    3/3

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  34. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों"

    ~ साहिर लुधियानवी

    3/3

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  35. "तुम्हे भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
    मुझे भी लोग कहते हैं की ये जलवे पराये हैं
    मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माजी की
    तुम्हारे साथ में गुजारी हुई रातों के साये हैं

    तआरुफ़ रोग बन जाए तो उसको भूलना बेहतर
    तआलुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
    वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
    उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा"

    2/3

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  36. "तुम्हे भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
    मुझे भी लोग कहते हैं की ये जलवे पराये हैं
    मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माजी की
    तुम्हारे साथ में गुजारी हुई रातों के साये हैं

    तआरुफ़ रोग बन जाए तो उसको भूलना बेहतर
    तआलुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
    वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
    उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा"

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    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  37. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों
    न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखो दिलनवाज़ी की
    न तुम मेरी तरफ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
    न मेरे दिल की धड़कन लडखडाये मेरी बातों से
    न ज़ाहिर हो हमारी कशमकश का राज़ नज़रों से"

    1/3

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  38. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों
    न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखो दिलनवाज़ी की
    न तुम मेरी तरफ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
    न मेरे दिल की धड़कन लडखडाये मेरी बातों से
    न ज़ाहिर हो हमारी कशमकश का राज़ नज़रों से"

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    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  39. "इतना लंबा कश लो यारो, दम निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    दिल में कुछ जलता है, शायद धुआँ धुआँ सा लगता है
    आँख में कुछ चुभता है, शायद सपना कोई सुलगता है
    दिल फूँको और इतना फूँको, दर्द निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    तेरे साथ गुजारी रातें, गरम गरम सी लगती हैं
    सब रातें रेशम की नहीं पर, नरम नरम सी लगती हैं
    रात ज़रा करवट बदले तो, पर निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #zindagi #life #nazm #urdu #rekhta

  40. "इतना लंबा कश लो यारो, दम निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    दिल में कुछ जलता है, शायद धुआँ धुआँ सा लगता है
    आँख में कुछ चुभता है, शायद सपना कोई सुलगता है
    दिल फूँको और इतना फूँको, दर्द निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    तेरे साथ गुजारी रातें, गरम गरम सी लगती हैं
    सब रातें रेशम की नहीं पर, नरम नरम सी लगती हैं
    रात ज़रा करवट बदले तो, पर निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #zindagi #life #nazm #urdu #rekhta

  41. मुंबई

    "रात जब मुंबई की सड़कों पर
    अपने पंजों को पेट में लेकर
    काली बिल्ली की तरह सोती है
    अपनी पलकें नहीं गिराती कभी,
    साँस की लंबी लंबी बौछारें
    उड़ती रहती हैं खुश्क साहिल पर!"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #mumbai #poetry #nazm #urdu #rekhta

  42. मुंबई

    "रात जब मुंबई की सड़कों पर
    अपने पंजों को पेट में लेकर
    काली बिल्ली की तरह सोती है
    अपनी पलकें नहीं गिराती कभी,
    साँस की लंबी लंबी बौछारें
    उड़ती रहती हैं खुश्क साहिल पर!"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #mumbai #poetry #nazm #urdu #rekhta

  43. लिबास

    मेरे कपड़ों में टंगा है
    तेरा ख़ुश-रंग लिबास!
    घर पे धोता हूँ हर बार उसे और सुखा के फिर से
    अपने हाथों से उसे इस्त्री करता हूँ मगर
    इस्त्री करने से जाती नहीं शिकनें उस की
    और धोने से गिले-शिकवों के चिकते नहीं मिटते!
    ज़िंदगी किस क़दर आसाँ होती
    रिश्ते गर होते लिबास
    और बदल लेते क़मीज़ों की तरह!

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta

  44. लिबास

    मेरे कपड़ों में टंगा है
    तेरा ख़ुश-रंग लिबास!
    घर पे धोता हूँ हर बार उसे और सुखा के फिर से
    अपने हाथों से उसे इस्त्री करता हूँ मगर
    इस्त्री करने से जाती नहीं शिकनें उस की
    और धोने से गिले-शिकवों के चिकते नहीं मिटते!
    ज़िंदगी किस क़दर आसाँ होती
    रिश्ते गर होते लिबास
    और बदल लेते क़मीज़ों की तरह!

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta

  45. "आदमी बुलबुला है पानी का
    और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है,
    फिर उभरता है, फिर से बहता है,
    न समंदर निगला सका इसको, न तवारीख़ तोड़ पाई है,
    वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का।"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta

  46. "आदमी बुलबुला है पानी का
    और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है,
    फिर उभरता है, फिर से बहता है,
    न समंदर निगला सका इसको, न तवारीख़ तोड़ पाई है,
    वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का।"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta