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#nazm — Public Fediverse posts

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  1. हमेशा देर कर देता हूँ
    by मुनीर नियाज़ी

    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
    ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
    उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
    बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
    हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

    #nazm

  2. हमेशा देर कर देता हूँ
    by मुनीर नियाज़ी

    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
    ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो
    उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    मदद करनी हो उस की यार की ढारस बंधाना हो
    बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं

    किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो
    हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
    हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

    #nazm

  3. "ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब दिल हैं न आँखें न साँसें कि जो
    रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जाएँगे
    जिस्म की मौत से ये भी मर जाएँगे
    ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब तो रोशनी हैं नवा हैं हवा हैं
    जो काले पहाड़ों से रुकते नहीं
    ज़ुल्म के दोज़खों से भी फुकते नहीं
    रोशनी और नवा के अलम
    मक़्तलों में पहुँचकर भी झुकते नहीं
    ख़्वाब तो हर्फ़ हैं
    ख़्वाब तो नूर हैं
    ख़्वाब सुक़रात हैं
    ख़्वाब मंसूर हैं"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #nazm #urdu #rekhta

  4. जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
    लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो

    फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सरे-मिम्बर है
    किसके है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो लो

    ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुमने
    क्यों पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो

    इन चिराग़ों के तले ऐसे अंधेरे क्यों हैं
    तुम भी रह जाओगे हैरान ज़रा देख तो लो

    तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
    निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

    ये सताइश की तमन्ना ये सिले की परवाह
    कहाँ लाए हैं ये अरमान ज़रा देख तो लो

    ~ जावेद अख़्तर

    #poetry #nazm #urdu #JavedAkhtar #Rekhta

  5. इधर से आज इक किसी के ग़म की
    कहानी का कारवाँ जो गुज़रा
    यतीम आँसू ने जैसे जाना
    कि इस कहानी की सरपरस्ती मिले
    तो मुम्किन है
    राह पाना
    तो इक कहानी की उंगली थामे
    उसी के ग़म को रूमाल करता
    उसी के बारे में
    झूठे-सच्चे सवाल करता
    ये मेरी पलकों तक आ गया है।

    ~ जावेद अख़्तर

    4/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  6. यतीम आँसू, यसीर आँसू
    न मोतबर था
    न रास्तों से ही बाख़बर था
    तो चलते चलते
    वो थम गया था
    ठिठक गया था
    झिझक गया था

    3/n

    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  7. क्या मैं ये समझूँ
    पहले कहीं नहीं था
    मुझे तो शक है कि ये कहीं था
    ये मेरे दिल और मेरी पलकों के दरमियाँ
    इक जो फ़ासला है
    जहाँ ख़यालों के शहर ज़िंन्दा हैं
    और ख्वाबों की तुर्बतें हैं
    जहाँ मुहब्बत के उजड़े बागों में
    तलि्ख़यों के बबूल हैं
    और कुछ नहीं है
    जहाँ से आगे हैं
    उलझनों के घनेरे जंगल
    ये आँसू
    शायद बहुत दिनों से
    वहीं छिपा था
    जिन्होंने इसको जनम दिया था
    वो रंज तो मसलेहत के हाथों
    न जाने कब क़त्ल हो गये थे
    तो करता फिर किसपे नाज़ आँसू
    कि हो गया बेजवाज़ आँसू

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  8. आँसू

    किसी का ग़म सुन के
    मेरी पलकों पे
    एक आँसू जो आ गया है
    ये आँसू क्या है

    ये आँसू क्या इक गवाह है
    मेरी दर्द-मंदी का मेरी इंसान-दोस्ती का
    ये आँसू क्या इक सुबूत है
    मेरी ज़िंदगी में ख़ुलूस की एक रौशनी का
    ये आँसू क्या ये बता रहा है
    कि मेरे सीने में एक हस्सास दिल है
    जिसने किसी की दिलदोज़ दास्ताँ जो सुनी
    तो सुनके तड़प उठा है
    पराये शोलों में जल रहा है
    मगर मैं फिर ख़ुद से पूछता हूँ
    ये दास्ताँ तो अभी सुनी है
    ये आँसू भी क्या अभी ढला है
    ये आँसू

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  9. कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया

    वो लोग बहुत ख़ुशक़िस्मत थे
    जो इश्क़ को काम समझते थे
    या काम से आशिक़ी करते थे
    हम जीते जी मसरूफ़ रहे
    कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

    काम इश्क़ के आड़े आता रहा
    और इश्क़ से काम उलझता रहा
    फिर आख़िर तंग आकर हम ने
    दोनों को अधूरा छोड़ दिया

    ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    #Faiz #Poetry #Nazm #Urdu #FaizAhmadFaiz #Rekhta

  10. "तेरी नज़्म से गुज़रते वक़्त खदशा रहता है
    पांव रख रहा हूँ जैसे, गीली लैंडस्केप पर इमरोज़ के तेरी नज़्म से इमेज उभरती है
    ब्रश से रंग टपकने लगता है
    वो अपने कोरे कैनवास पर नज्में लिखता है,
    तुम अपने कागजों पर नज्में पेंट करती हो"

    ~ गुलज़ार

    #AmritaPritam #Gulzar #poetry #nazm

  11. "आओ फिर नज़्म कहें
    फिर किसी दर्द को सहलाकर सुजा ले आँखें
    फिर किसी दुखती हुई रग में छुपा दें नश्तर
    या किसी भूली हुई राह पे मुड़कर एक बार
    नाम लेकर किसी हमनाम को आवाज़ ही दें लें

    फिर कोई नज़्म कहें...."

    ~ गुलज़ार

    #poetry #nazm #gulzar #urdu #Rekhta

  12. कभी सीने पर रखकर लेट जाते थे
    कभी गोदी में लेते थे
    कभी घुटनों को अपने रिहल की सूरत बनाकर
    नीम सजदे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
    वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी
    मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
    और महके हुए रुक्के
    किताबें मँगाने, गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
    उनका क्या होगा
    वो शायद अब नही होंगे!!

    ~ गुलज़ार

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    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  13. कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
    कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं
    बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
    जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
    जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
    अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है
    किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, वो कट गया है

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    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  14. किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
    बड़ी हसरत से तकती हैं
    महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
    जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
    अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
    बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें
    उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
    जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
    जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं

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    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  15. To the people who love books and reading them. Here is a nazm for you. One of the best by Gulzar Sahab!

    youtu.be/tEBHmsx2Pjw

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  16. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों"

    ~ साहिर लुधियानवी

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    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  17. "तुम्हे भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
    मुझे भी लोग कहते हैं की ये जलवे पराये हैं
    मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माजी की
    तुम्हारे साथ में गुजारी हुई रातों के साये हैं

    तआरुफ़ रोग बन जाए तो उसको भूलना बेहतर
    तआलुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
    वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
    उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा"

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    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  18. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों
    न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखो दिलनवाज़ी की
    न तुम मेरी तरफ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
    न मेरे दिल की धड़कन लडखडाये मेरी बातों से
    न ज़ाहिर हो हमारी कशमकश का राज़ नज़रों से"

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    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  19. "इतना लंबा कश लो यारो, दम निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    दिल में कुछ जलता है, शायद धुआँ धुआँ सा लगता है
    आँख में कुछ चुभता है, शायद सपना कोई सुलगता है
    दिल फूँको और इतना फूँको, दर्द निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    तेरे साथ गुजारी रातें, गरम गरम सी लगती हैं
    सब रातें रेशम की नहीं पर, नरम नरम सी लगती हैं
    रात ज़रा करवट बदले तो, पर निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #zindagi #life #nazm #urdu #rekhta

  20. मुंबई

    "रात जब मुंबई की सड़कों पर
    अपने पंजों को पेट में लेकर
    काली बिल्ली की तरह सोती है
    अपनी पलकें नहीं गिराती कभी,
    साँस की लंबी लंबी बौछारें
    उड़ती रहती हैं खुश्क साहिल पर!"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #mumbai #poetry #nazm #urdu #rekhta

  21. लिबास

    मेरे कपड़ों में टंगा है
    तेरा ख़ुश-रंग लिबास!
    घर पे धोता हूँ हर बार उसे और सुखा के फिर से
    अपने हाथों से उसे इस्त्री करता हूँ मगर
    इस्त्री करने से जाती नहीं शिकनें उस की
    और धोने से गिले-शिकवों के चिकते नहीं मिटते!
    ज़िंदगी किस क़दर आसाँ होती
    रिश्ते गर होते लिबास
    और बदल लेते क़मीज़ों की तरह!

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta

  22. "आदमी बुलबुला है पानी का
    और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है,
    फिर उभरता है, फिर से बहता है,
    न समंदर निगला सका इसको, न तवारीख़ तोड़ पाई है,
    वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का।"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta

  23. "देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा
    देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,
    ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.
    काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,
    ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,
    जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta

  24. "आँख बोझल है
    मगर नींद नहीं आती है "

    ~परवीन शाकिर

    #ParveenShakir #poetry #nazm #urdu #rekhta

  25. उन असीरों के नाम
    जिन के सीनों में फ़र्दा के शब-ताब गौहर
    जेल-ख़ानों की शोरीदा रातों की सरसर में
    जल जल के अंजुम-नुमा होगए हैं
    आने वाले दिनों के सफ़ीरों के नाम
    वो जो ख़ुश्बू-ए-गुल की तरह
    अपने पैग़ाम पर ख़ुद फ़िदा हो गए हैं

    ~फ़ैज अहमद फ़ैज

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    #faiz #poetry #urdu #nazm #rekhta

  26. पढ़ने वालों के नाम
    वो जो असहाब-ए-तब्ल-ओ-अलम
    के दरों पर किताब और क़लम
    का तक़ाज़ा लिए हाथ फैलाए
    वो मासूम जो भोले-पन में
    वहाँ अपने नन्हे चराग़ों में लौ की लगन
    ले के पहुँचे जहाँ
    बट रहे थे घटा-टोप बे-अंत रातों के साए

    4/n

    #faiz #poetry #urdu #nazm #rekhta

  27. उन हसीनाओं के नाम
    जिन की आँखों के गुल
    चिलमनों और दरीचों की बेलों पे बे-कार खिल खिल के
    मुरझा गए हैं
    उन बियाहताओं के नाम
    जिन के बदन
    बे मोहब्बत रिया-कार सेजों पे सज सज के उक्ता गए हैं
    बेवाओं के नाम
    कटड़ियों और गलियों मोहल्लों के नाम
    जिन की नापाक ख़ाशाक से चाँद रातों
    को आ आ के करता है अक्सर वज़ू
    जिन के सायों में करती है आह-ओ-बुका
    आँचलों की हिना
    चूड़ियों की खनक
    काकुलों की महक
    आरज़ू-मंद सीनों की अपने पसीने में जुल्ने की बू

    3/n

    #faiz #poetry #urdu #nazm #rekhta

  28. बादशाह-ए-जहाँ वाली-ए-मा-सिवा, नाएब-उल-अल्लाह फ़िल-अर्ज़
    दहक़ाँ के नाम
    जिस के ढोरों को ज़ालिम हँका ले गए
    जिस की बेटी को डाकू उठा ले गए
    हाथ भर खेत से एक अंगुश्त पटवार ने काट ली है
    दूसरी मालिये के बहाने से सरकार ने काट ली है
    जिस की पग ज़ोर वालों के पाँव-तले
    धज्जियाँ हो गई है
    उन दुखी माओं के नाम
    रात में जिन के बच्चे बिलकते हैं और
    नींद की मार खाए हुए बाज़ुओं में सँभलते नहीं
    दुख बताते नहीं
    मिन्नतों ज़ारियों से बहलते नहीं

    2/n

    #faiz #poetry #urdu #nazm #rekhta