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#rekhta — Public Fediverse posts

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  1. "कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
    तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #shayari #urdu #rekhta

  2. "किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
    तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #shayari #urdu #rekhta

  3. "रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
    आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #shayari #urdu #rekhta

  4. "ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब दिल हैं न आँखें न साँसें कि जो
    रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जाएँगे
    जिस्म की मौत से ये भी मर जाएँगे
    ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब तो रोशनी हैं नवा हैं हवा हैं
    जो काले पहाड़ों से रुकते नहीं
    ज़ुल्म के दोज़खों से भी फुकते नहीं
    रोशनी और नवा के अलम
    मक़्तलों में पहुँचकर भी झुकते नहीं
    ख़्वाब तो हर्फ़ हैं
    ख़्वाब तो नूर हैं
    ख़्वाब सुक़रात हैं
    ख़्वाब मंसूर हैं"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #nazm #urdu #rekhta

  5. "अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
    आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #shayari #urdu #rekhta

  6. जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
    लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो

    फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सरे-मिम्बर है
    किसके है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो लो

    ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुमने
    क्यों पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो

    इन चिराग़ों के तले ऐसे अंधेरे क्यों हैं
    तुम भी रह जाओगे हैरान ज़रा देख तो लो

    तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
    निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो

    ये सताइश की तमन्ना ये सिले की परवाह
    कहाँ लाए हैं ये अरमान ज़रा देख तो लो

    ~ जावेद अख़्तर

    #poetry #nazm #urdu #JavedAkhtar #Rekhta

  7. Here is Hazaron Khwahishen Aisi in the voice of Jagjit Singh from the Tele Series Mirza Ghalib starring Nasiruddin Shah.

    youtu.be/1UGntT1CZXw

    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  8. हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की
    वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले

    मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
    उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

    कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़
    पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

    ~ ग़ालिब

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  9. भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का
    अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले

    मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए
    हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले

    हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी
    फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  10. हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
    बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

    डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर
    वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले

    निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
    बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  11. इधर से आज इक किसी के ग़म की
    कहानी का कारवाँ जो गुज़रा
    यतीम आँसू ने जैसे जाना
    कि इस कहानी की सरपरस्ती मिले
    तो मुम्किन है
    राह पाना
    तो इक कहानी की उंगली थामे
    उसी के ग़म को रूमाल करता
    उसी के बारे में
    झूठे-सच्चे सवाल करता
    ये मेरी पलकों तक आ गया है।

    ~ जावेद अख़्तर

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  12. यतीम आँसू, यसीर आँसू
    न मोतबर था
    न रास्तों से ही बाख़बर था
    तो चलते चलते
    वो थम गया था
    ठिठक गया था
    झिझक गया था

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  13. क्या मैं ये समझूँ
    पहले कहीं नहीं था
    मुझे तो शक है कि ये कहीं था
    ये मेरे दिल और मेरी पलकों के दरमियाँ
    इक जो फ़ासला है
    जहाँ ख़यालों के शहर ज़िंन्दा हैं
    और ख्वाबों की तुर्बतें हैं
    जहाँ मुहब्बत के उजड़े बागों में
    तलि्ख़यों के बबूल हैं
    और कुछ नहीं है
    जहाँ से आगे हैं
    उलझनों के घनेरे जंगल
    ये आँसू
    शायद बहुत दिनों से
    वहीं छिपा था
    जिन्होंने इसको जनम दिया था
    वो रंज तो मसलेहत के हाथों
    न जाने कब क़त्ल हो गये थे
    तो करता फिर किसपे नाज़ आँसू
    कि हो गया बेजवाज़ आँसू

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  14. आँसू

    किसी का ग़म सुन के
    मेरी पलकों पे
    एक आँसू जो आ गया है
    ये आँसू क्या है

    ये आँसू क्या इक गवाह है
    मेरी दर्द-मंदी का मेरी इंसान-दोस्ती का
    ये आँसू क्या इक सुबूत है
    मेरी ज़िंदगी में ख़ुलूस की एक रौशनी का
    ये आँसू क्या ये बता रहा है
    कि मेरे सीने में एक हस्सास दिल है
    जिसने किसी की दिलदोज़ दास्ताँ जो सुनी
    तो सुनके तड़प उठा है
    पराये शोलों में जल रहा है
    मगर मैं फिर ख़ुद से पूछता हूँ
    ये दास्ताँ तो अभी सुनी है
    ये आँसू भी क्या अभी ढला है
    ये आँसू

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    #JavedAkhtar #Nazm #Poetry #Urdu #Aansu #Rekhta

  15. कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया

    वो लोग बहुत ख़ुशक़िस्मत थे
    जो इश्क़ को काम समझते थे
    या काम से आशिक़ी करते थे
    हम जीते जी मसरूफ़ रहे
    कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

    काम इश्क़ के आड़े आता रहा
    और इश्क़ से काम उलझता रहा
    फिर आख़िर तंग आकर हम ने
    दोनों को अधूरा छोड़ दिया

    ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    #Faiz #Poetry #Nazm #Urdu #FaizAhmadFaiz #Rekhta

  16. "आओ फिर नज़्म कहें
    फिर किसी दर्द को सहलाकर सुजा ले आँखें
    फिर किसी दुखती हुई रग में छुपा दें नश्तर
    या किसी भूली हुई राह पे मुड़कर एक बार
    नाम लेकर किसी हमनाम को आवाज़ ही दें लें

    फिर कोई नज़्म कहें...."

    ~ गुलज़ार

    #poetry #nazm #gulzar #urdu #Rekhta

  17. Remembering Chacha Ghalib on his 222nd Birthday. He has been a constant source of hope and rebellion all the time.

    "न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
    डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

    हुआ जब ग़म से यूँ बे-हिस तो ग़म क्या सर के कटने का
    न होता गर जुदा तन से तो ज़ानू पर धरा होता

    हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
    वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता"

    ~ ग़ालिब

    #Poetry #Ghalib222 #MirzaGhalib #Urdu #Rekhta

    Photos from Mazar-e-Ghalib, New Delhi

  18. "ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
    क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम"

    ~ साहिर लुधियानवी

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #urdu #rekhta

  19. यही हालात इब्तदा से रहे
    लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे

    बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन
    ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे

    इन चिराग़ों में तेल ही कम था
    क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे

    बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी
    तुम नहीं रहे तो ये दिलासे रहे

    उसके बंदों को देखकर कहिये
    हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे

    ज़िन्दगी की शराब माँगते हो
    हमको देखो कि पी के प्यासे रहे

    ~ जावेद अख़्तर

    इब्तदा: beginning
    मौसीक़ी: music

    #javedakhtar #poetry #ghazal #shayari #life #rekhta #urdu

  20. "पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन है
    कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या"

    ~ग़ालिब

    Register at: jashnerekhta.org/register/

    #urdu #rekhta #culture #india #festival #delhi

  21. "इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
    हम न सोए रात थक कर सो गई"

    ~ राही मासूम रज़ा

    #raat #poetry #shayari #urdu #life #rekhta

  22. "ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना
    न सर पत्थर से टकराए तो कहना

    ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल
    समझ में जब ये आ जाए तो कहना

    बहुत ख़ुश हो कि उस ने कुछ कहा है
    न कह कर वो मुकर जाए तो कहना

    बदल जाओगे तुम ग़म सुन के मेरे
    कभी दिल ग़म से घबराए तो कहना

    धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है
    न पूरे शहर पर छाए तो कहना"

    ~ जावेद अख़्तर

    #javedakhtar #ghazal #poetry #urdu #lava #rekhta

  23. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों"

    ~ साहिर लुधियानवी

    3/3

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  24. "तुम्हे भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
    मुझे भी लोग कहते हैं की ये जलवे पराये हैं
    मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माजी की
    तुम्हारे साथ में गुजारी हुई रातों के साये हैं

    तआरुफ़ रोग बन जाए तो उसको भूलना बेहतर
    तआलुक बोझ बन जाए तो उसको तोड़ना अच्छा
    वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
    उसे इक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा"

    2/3

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  25. "चलो इक बार फिर से अज़नबी बन जाएँ हम दोनों
    न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखो दिलनवाज़ी की
    न तुम मेरी तरफ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
    न मेरे दिल की धड़कन लडखडाये मेरी बातों से
    न ज़ाहिर हो हमारी कशमकश का राज़ नज़रों से"

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    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #nazm #urdu #love #life #rekhta

  26. "अक़्ल ये कहती है दुनिया मिलती है बाज़ार में
    दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए"

    ~ जावेद अख़्तर

    #javedakhtar #shayari #poetry #urdu #rekhta