#diettherapeutics — Public Fediverse posts
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जीमीकन्द – बड़े काम का कंद
जीमीकन्द सूरन नाम से भी प्रचलित है। यह जमीन के नीचे उगने वाला कंद है। इसका कंद चपटा गोल गहरे भूरे या बादामी रंग का होता है। इसकी दो प्रजातियाँ प्रचलित हैं। एक के कंद छोटे और दूसरे के आकार में काफी बड़े होते हैं। कंद के अंदर का रंग दो प्रकार का होता है। एक सफेद और दूसरा नारंगी-बादामी...
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कमरख बड़े काम का फल
इमली के ठेलों पर एक फल और साथ में दिखाई पड़ता है। ये पाँच फलकों में बंटा हुआ हल्का पीले से गाढ़े पीले रंग का है। ये कमरख का पका फल है। कच्चा फल हरे रंग का होता है। फल को गोलाई में काटने पर ये पाँच कोन वाले सितारे की तरह लगता है। कच्चा फल स्वाद में खट्टा-कसैला और पका फल खट्टा-मीठा होता है...
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सनई के फूल सेहत के मूल
सनई का फूल उन कई प्रकार के पौधों जिनके तने से प्राप्त फाइबर से रस्सियाँ बनाई जाती हैं में से एक पौधे से प्राप्त होता है। इसकी छोटी या फिर थोड़ी बड़ी कलियों को सब्जी के लिए प्रयोग किया जाता है जिससे बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी बनती है...
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वॉटर लिली है लाख दु:खों की दवा
वॉटर लिली की प्रजातियों में कमल जैसे दिखने वाले अलग रंगों के फूल खिलते हैं। इस पौधे का हर एक भाग औषधीय महत्व लिए है। हम यहाँ लाल और सफ़ेद वॉटर लिली के बारे में बात करेंगे। इसका भोजन में उपयोग होता है। इसकी जड़ से प्राप्त होने वाले कन्द, बीज, फूल के डंठल और फूल का भोजन के रूप में उपयोग होता है...
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बड़े काम का चिचिंडा
बड़े काम का चिचिंडा लौकी, तरोई परिवार की सब्जी है। आकार में ये तरोई जैसे पतले पर लम्बाई में उससे कहीं ज्यादा तक होते हैं। वानस्पतिक विवरण के आधार पर लम्बाई में ये 15 से.मी. से 150 से.मी. तक होते हैं। खाने के लिए मध्यम आकार के फलों को प्राथमिकता दी जाती है। रंग में ये बहुत हल्के हरे से लेकर गाढ़े हरे रंग के होते हैं...
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कुल्फा है सेहत और स्वास्थ्य के लिए
कुल्फा गुणों से भरपूर एक पत्तेदार सब्जी है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने अपनी बहुत उपयोगी औषधीय पौधों की सूची में शामिल किया है। वानस्पतिक आधार पर यह एक खाने योग्य जंगली पौधा है। यह गाँव से लेकर शहर तक कहीं भी बड़ी आसानी से पाया जाता है। बाग- बगीचों, मैदानों, सड़क किनारे कहीं भी उगा हुआ यह दिख जाएगा...
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थाली में हो पोए तो रोग दूर होए
हरी पत्तेदार सब्जी में आने वाली पोय गुणों से भरपूर है। इसका उपयोग अब कम होता जा रहा है। आसानी से पनपने वाली ये बेल बाग-बगीचों में खूब देखी जा सकती है। लोग इसे बोते भी हैं। पक्षियों द्वारा इसके बीज फैलाये जाने की वजह से यह अपने आप भी उग आती है। बिना ज्यादा देखरेख के यह बेल बहुत अच्छे से पनपती है...
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मकोय है मिनेरल्स का अच्छा स्रोत
मकोय औषधीय महत्व की वनस्पति है। यह कहीं भी बड़ी आसानी से मिल जाएगी। बावजूद इसके यह अपनी पहचान खोती जा रही है। यह अक्सर खर पतवारों के आसपास उगा मिलता है। प्राचीन समय से औषधीय महत्व की वजह से मकोय एक खास स्थान रखता है। पहले गांवों में कई बीमारियों के इलाज में इसका उपयोग घरेलू नुस्खों के तौर पर होता था...
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कैथा है पोषण की खान
कैथा जंगली पादप श्रेणी का फल है। कैथा को नाम से बहुत लोग जानते होंगे पर इसका इस्तेमाल भोजन में कम ही घरों में होता है। गाँव में भी इसके पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। कैथे का कच्चा और पका फल दोनों खाने योग्य होता है। कचा फल खट्टा हल्का कसैला (एस्ट्रिंजेंट) और पका फल खट्टा-मीठा होता है...
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हरफरौरी है गुणों की खान
हरफरौरी का पेड़ आमतौर पर सजावट के लिए लगाया जाता है। हरफरौरी का पेड़ अब शहरों ही नहीं गांवों में भी कम दिखता है। आदिवासी क्षेत्रों में ये आसानी से उपलब्ध है। आदिवासी क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल भोजन में होता आ रहा है। जिन भी क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल होता रहा है या हो रहा है वहाँ आमतौर पर इसका आचार या चटनी बनाई जाती है...
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नीम – लाख दुःखों की एक दवा
नीम एक औषधीय पेड़ है। देश के कई क्षेत्रों में नीम की पत्ती, फूल, और फल का भोजन में इस्तेमाल होता है। नीम के फूल और पत्ती का सब्जी में उपयोग होता है। पके फल को ऐसे ही खाया जाता है। नीम का फल स्वाद में मिश्रित मीठा-कड़वा (बिटर-स्वीट) होता है...
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महुआ एक लाभ अनेक
महुआ आदिवासियों के लिए वरदान माना जाता है। आदिवासी भूख से लेकर इलाज तक की जरूरतों को इससे पूरा करते हैं। वे इसके तने की छाल, पत्तियों से लेकर फूल, फल, और बीज तक का इस्तेमाल करते हैं...
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लसोढ़ा है औषधीय गुणों की खान
लसोढ़ा जंगली पादप श्रेणी का गाँव में प्रचलित फल है। परंतु वहाँ पर भी यह मध्यम प्रचलन वाला फल है। पके फल का सेवन आदिवासी और गरीब परिवारों में ज्यादा देखा गया है। इसका उपयोग उन परिवारों में भी होता है जो घरेलू नुस्खों के माध्यम से इसको औषधीय महत्व वाला मानते हैं। इस्तेमाल में लसोढ़े का अचार आम प्रचलन रेसिपी है...
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बड़हल – बड़ी समस्याओं का आसान हल
आम और जामुन के इस मौसम में मुख्यतः गाँव में एक और फल का चलन रहता है। इसे हिन्दी में बड़हल और अन्य भाषाओं में अलग-अलग नाम से जाना जाता है...
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