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1000 results for “urdu_se_dosti”

  1. "ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब दिल हैं न आँखें न साँसें कि जो
    रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जाएँगे
    जिस्म की मौत से ये भी मर जाएँगे
    ख़्वाब मरते नहीं
    ख़्वाब तो रोशनी हैं नवा हैं हवा हैं
    जो काले पहाड़ों से रुकते नहीं
    ज़ुल्म के दोज़खों से भी फुकते नहीं
    रोशनी और नवा के अलम
    मक़्तलों में पहुँचकर भी झुकते नहीं
    ख़्वाब तो हर्फ़ हैं
    ख़्वाब तो नूर हैं
    ख़्वाब सुक़रात हैं
    ख़्वाब मंसूर हैं"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #nazm #urdu #rekhta

  2. "अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
    आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #shayari #urdu #rekhta

  3. "अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
    आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ"

    ~ अहमद फ़राज़

    #AhmadFaraz #BirthAnniversary #Poetry #shayari #urdu #rekhta

  4. Here is Hazaron Khwahishen Aisi in the voice of Jagjit Singh from the Tele Series Mirza Ghalib starring Nasiruddin Shah.

    youtu.be/1UGntT1CZXw

    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  5. Here is Hazaron Khwahishen Aisi in the voice of Jagjit Singh from the Tele Series Mirza Ghalib starring Nasiruddin Shah.

    youtu.be/1UGntT1CZXw

    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  6. हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की
    वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले

    मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
    उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

    कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़
    पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

    ~ ग़ालिब

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  7. हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की
    वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले

    मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
    उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

    कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़
    पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

    ~ ग़ालिब

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  8. भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का
    अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले

    मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए
    हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले

    हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी
    फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  9. भरम खुल जाए ज़ालिम तेरे क़ामत की दराज़ी का
    अगर इस तुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़म का पेच-ओ-ख़म निकले

    मगर लिखवाए कोई उस को ख़त तो हम से लिखवाए
    हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले

    हुई इस दौर में मंसूब मुझ से बादा-आशामी
    फिर आया वो ज़माना जो जहाँ में जाम-ए-जम निकले

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  10. हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
    बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

    डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर
    वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले

    निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
    बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  11. हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
    बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

    डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर
    वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले

    निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
    बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

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    #Ghalib #MirzaGhalib #Ghazal #Poetry #Music #Life #Urdu #Rekhta

  12. "आओ फिर नज़्म कहें
    फिर किसी दर्द को सहलाकर सुजा ले आँखें
    फिर किसी दुखती हुई रग में छुपा दें नश्तर
    या किसी भूली हुई राह पे मुड़कर एक बार
    नाम लेकर किसी हमनाम को आवाज़ ही दें लें

    फिर कोई नज़्म कहें...."

    ~ गुलज़ार

    #poetry #nazm #gulzar #urdu #Rekhta

  13. "आओ फिर नज़्म कहें
    फिर किसी दर्द को सहलाकर सुजा ले आँखें
    फिर किसी दुखती हुई रग में छुपा दें नश्तर
    या किसी भूली हुई राह पे मुड़कर एक बार
    नाम लेकर किसी हमनाम को आवाज़ ही दें लें

    फिर कोई नज़्म कहें...."

    ~ गुलज़ार

    #poetry #nazm #gulzar #urdu #Rekhta

  14. Remembering Chacha Ghalib on his 222nd Birthday. He has been a constant source of hope and rebellion all the time.

    "न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
    डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

    हुआ जब ग़म से यूँ बे-हिस तो ग़म क्या सर के कटने का
    न होता गर जुदा तन से तो ज़ानू पर धरा होता

    हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
    वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता"

    ~ ग़ालिब

    #Poetry #Ghalib222 #MirzaGhalib #Urdu #Rekhta

    Photos from Mazar-e-Ghalib, New Delhi

  15. Remembering Chacha Ghalib on his 222nd Birthday. He has been a constant source of hope and rebellion all the time.

    "न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
    डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

    हुआ जब ग़म से यूँ बे-हिस तो ग़म क्या सर के कटने का
    न होता गर जुदा तन से तो ज़ानू पर धरा होता

    हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
    वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता"

    ~ ग़ालिब

    #Poetry #Ghalib222 #MirzaGhalib #Urdu #Rekhta

    Photos from Mazar-e-Ghalib, New Delhi

  16. "ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
    क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम"

    ~ साहिर लुधियानवी

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #urdu #rekhta

  17. "ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
    क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम"

    ~ साहिर लुधियानवी

    #SahirLudhianvi #poetry #shayari #urdu #rekhta

  18. कभी सीने पर रखकर लेट जाते थे
    कभी गोदी में लेते थे
    कभी घुटनों को अपने रिहल की सूरत बनाकर
    नीम सजदे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
    वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी
    मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
    और महके हुए रुक्के
    किताबें मँगाने, गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
    उनका क्या होगा
    वो शायद अब नही होंगे!!

    ~ गुलज़ार

    3/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  19. कभी सीने पर रखकर लेट जाते थे
    कभी गोदी में लेते थे
    कभी घुटनों को अपने रिहल की सूरत बनाकर
    नीम सजदे में पढ़ा करते थे, छूते थे जबीं से
    वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी
    मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
    और महके हुए रुक्के
    किताबें मँगाने, गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे
    उनका क्या होगा
    वो शायद अब नही होंगे!!

    ~ गुलज़ार

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    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  20. कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
    कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं
    बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
    जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
    जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
    अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है
    किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, वो कट गया है

    2/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  21. कोई सफा पलटता हूँ तो इक सिसकी निकलती है
    कई लफ्ज़ों के मानी गिर पड़े हैं
    बिना पत्तों के सूखे टुंड लगते हैं वो अल्फ़ाज़
    जिनपर अब कोई मानी नहीं उगते
    जबां पर जो ज़ायका आता था जो सफ़ा पलटने का
    अब ऊँगली क्लिक करने से बस झपकी गुजरती है
    किताबों से जो ज़ाती राब्ता था, वो कट गया है

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    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  22. किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
    बड़ी हसरत से तकती हैं
    महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
    जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
    अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
    बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें
    उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
    जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
    जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं

    1/3

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  23. किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
    बड़ी हसरत से तकती हैं
    महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
    जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
    अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
    बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें
    उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है
    जो कदरें वो सुनाती थी कि जिनके
    जो रिश्ते वो सुनाती थी वो सारे उधरे-उधरे हैं

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    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  24. To the people who love books and reading them. Here is a nazm for you. One of the best by Gulzar Sahab!

    youtu.be/tEBHmsx2Pjw

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  25. To the people who love books and reading them. Here is a nazm for you. One of the best by Gulzar Sahab!

    youtu.be/tEBHmsx2Pjw

    #books #gulzar #poetry #reading #kitaaben #urdu #nazm

  26. "अक़्ल ये कहती है दुनिया मिलती है बाज़ार में
    दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए"

    ~ जावेद अख़्तर

    #javedakhtar #shayari #poetry #urdu #rekhta

  27. "अक़्ल ये कहती है दुनिया मिलती है बाज़ार में
    दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए"

    ~ जावेद अख़्तर

    #javedakhtar #shayari #poetry #urdu #rekhta

  28. "इतना लंबा कश लो यारो, दम निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    दिल में कुछ जलता है, शायद धुआँ धुआँ सा लगता है
    आँख में कुछ चुभता है, शायद सपना कोई सुलगता है
    दिल फूँको और इतना फूँको, दर्द निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए

    तेरे साथ गुजारी रातें, गरम गरम सी लगती हैं
    सब रातें रेशम की नहीं पर, नरम नरम सी लगती हैं
    रात ज़रा करवट बदले तो, पर निकल जाए
    ज़िन्दगी सुलगाओ यारों, ग़म निकल जाए"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #zindagi #life #nazm #urdu #rekhta

  29. मुंबई

    "रात जब मुंबई की सड़कों पर
    अपने पंजों को पेट में लेकर
    काली बिल्ली की तरह सोती है
    अपनी पलकें नहीं गिराती कभी,
    साँस की लंबी लंबी बौछारें
    उड़ती रहती हैं खुश्क साहिल पर!"

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #mumbai #poetry #nazm #urdu #rekhta

  30. लिबास

    मेरे कपड़ों में टंगा है
    तेरा ख़ुश-रंग लिबास!
    घर पे धोता हूँ हर बार उसे और सुखा के फिर से
    अपने हाथों से उसे इस्त्री करता हूँ मगर
    इस्त्री करने से जाती नहीं शिकनें उस की
    और धोने से गिले-शिकवों के चिकते नहीं मिटते!
    ज़िंदगी किस क़दर आसाँ होती
    रिश्ते गर होते लिबास
    और बदल लेते क़मीज़ों की तरह!

    ~गुलज़ार

    #Gulzar #poetry #nazm #urdu #rekhta